उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उनके निर्देश पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और आम नागरिकों की शिकायतों, समस्याओं की उपेक्षा करने के मामले में वाराणसी के चकबंदी उप संचालक (डीडीसी) समेत दो विभागों के आठ अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। वाराणसी के मंडलायुक्त को चकबंदी में अनियमितता की जांच सौंपी गई है।

आयुक्त चकबंदी ने डीडीसी प्रकाश राय, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी संजय राय, चकबंदी अधिकारी शैलेंद्र द्विवेदी, चकबंदी अधिकारी लाल सिंह, पेशी कानूनगो राजेश कुमार, चकबंदीकर्ता अमित कुमार सिंह और चकबंदी लेखपाल मंगला चौबे को मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निलंबित कर दिया गया है । शिकायतकर्ता द्वारा खरीदी गई जमीन या उसके समतुल्य भूमि पर तत्काल कब्जा दिलाने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं।
वाराणसी की तहसील पिंडरा के अंतर्गत चकबंदी कार्य में अनियमितता की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई थी। वर्ष 1991 में तहसील पिंडरा में जमीन ली गई थी। पीड़ित को जमीन पर कब्जा इसके बाद भी नहीं दिया गया।जब चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई तो इसमें अनियमितता बरती गई।
जमीन आबादी की थी, लेकिन इसके अन्य दिखा दिया गया।

इसके साथ ही स्थानांतरण नीति की उपेक्षा कर दोषपूर्ण रीति से कार्मिकों का स्थानांतरण करने के प्रकरण में तत्कालीन निदेशक, आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा संतोष अग्रवाल को मुख्यमंत्री ने निलंबित कर दिया गया है।
फिलहाल वो कार्यालय निदेशक कोषागार के यहां से संबद्ध हैं। अगले महीने वो रिटायर होने वाली हैं । उन पर आरोप है कि उन्होंने 458 तबादले नियम विरुद्ध कर दिए थे।दो सदस्यीय कमेटी को जांच करने के आदेश दिए गए है उन्हें पद से हटाकर। उन्हें निलंबित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर ही किया गया है ।

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